चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में मंगलवार, 29 अप्रैल 2026 को खेले गए मैच 22 में Chennai Super Kings (CSK) ने कोलकाता नाइट राइडर्स को 32 रनों से करारी शिकस्त दी। इस जीत के असली हीरो रहे युवा तेज गेंदबाज Anshul Kamboj, जिन्होंने न केवल मैच जिताया बल्कि पर्पल कैप की रेस में खुद को शीर्ष पर पहुंचा लिया है। अब मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है क्योंकि अंशुल और गुजरात टाइटंस के प्रसिद्ध कृष्णा दोनों के खाते में 10-10 विकेट हो चुके हैं।
मैच की बात करें तो CSK ने 193 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था। जवाब में Kolkata Knight Riders (KKR) की टीम संघर्ष करती दिखी और निर्धारित ओवरों में केवल 160 रन ही बना सकी। यहाँ अंशुल का जादू चला; उन्होंने 32 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनकी सटीक लेंथ और अतिरिक्त उछाल ने केकेआर के बल्लेबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। लेकिन ट्विस्ट यह है कि विकेटों की संख्या बराबर होने के बावजूद, Prasidh Krishna, जो Gujarat Titans की ओर से खेलते हैं, उनकी इकोनॉमी रेट बेहतर होने के कारण पर्पल कैप पर कब्जा जमाए हुए हैं।
अंशुल का 'हिट द डेक' अंदाज और घातक आंकड़े
अंशुल का इस सीजन का प्रदर्शन किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने अब तक खेले पांचों मैचों में विकेट लिए हैं—जी हाँ, एक भी ऐसा मैच नहीं गया जिसमें वह खाली हाथ रहे हों। वह लगातार 135 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं और उनका ऑफ-स्टंप लाइन हमला बल्लेबाजों के लिए किसी दुःस्वप्न जैसा है। क्रिकेट के जानकारों ने उन्हें "हिट द डेक" गेंदबाज का खिताब दिया है, जो गेंद को टप्पा खिलाकर तेजी से ऊपर उठाते हैं।
पर्पल कैप की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो रेस काफी करीबी है। राजस्थान रॉयल्स के रवि बिश्नोई 9 विकेटों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। वहीं, जोफ्रा आर्चर 7 विकेट लेकर चौथे नंबर पर टिके हैं। इसके अलावा प्रिंस यादव (लखनउ सुपर जाइंट्स), जैकब डफी (आरसीबी) और वैभव अरोड़ा (केकेआर) 6-6 विकेटों के साथ संयुक्त पांचवें स्थान पर हैं।
घरेलू क्रिकेट का वह ऐतिहासिक कारनामा
अंशुल की यह सफलता अचानक नहीं आई है। उनके पास घरेलू क्रिकेट का एक ऐसा रिकॉर्ड है जो बहुत कम लोग हासिल कर पाते हैं। नवंबर 2024 में, हरियाणा की तरफ से केरल के खिलाफ खेलते हुए अंशुल ने एक ही पारी में सभी 10 विकेट झटक डाले थे और मात्र 49 रन दिए थे (10/49)। यह उपलब्धि उन्हें रणजी ट्रॉफी के इतिहास के केवल तीसरे गेंदबाज की श्रेणी में खड़ा करती है।
सिर्फ इतना ही नहीं, 2023-24 के विजय हजारे ट्रॉफी सीजन में भी उन्होंने 10 मैचों में 17 विकेट लेकर अपनी निरंतरता साबित की थी। इसी प्रदर्शन की बदौलत उन्हें इंडिया-ए टीम में जगह मिली। दिलचस्प बात यह है कि 2024 में वह मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे, लेकिन 2025 की नीलामी में CSK ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। अब MS Dhoni के मार्गदर्शन और कोचिंग स्टाफ की मेहनत ने उन्हें डेथ ओवरों का एक खतरनाक स्पेशलिस्ट बना दिया है।
ऑरेंज कैप की दौड़ और अन्य समीकरण
जहाँ गेंदबाजी में कांटे की टक्कर है, वहीं बल्लेबाजों के लिए यह सीजन थोड़ा कठिन रहा है। ऑरेंज कैप की दौड़ में अब तक केवल तीन ही बल्लेबाज 200 रनों का आंकड़ा पार कर पाए हैं। आरसीबी के रजत पाटीदार 195 रनों के साथ चौथे स्थान पर हैं, जबकि संजू सैमसन 185 रनों के साथ पांचवें नंबर पर चल रहे हैं।
मैच के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि अंशुल की फॉर्म CSK के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। उनकी गेंदों की गति और सटीकता का मेल उन्हें इस सीजन का सबसे घातक गेंदबाज बना सकता है। अब देखना यह है कि क्या वह प्रसिद्ध कृष्णा की बेहतर इकोनॉमी रेट को मात देकर पर्पल कैप अपने नाम कर पाते हैं या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंशुल कंबोज और प्रसिद्ध कृष्णा दोनों के 10 विकेट हैं, तो कैप किसके पास है?
पर्पल कैप प्रसिद्ध कृष्णा के पास है क्योंकि जब दो गेंदबाजों के विकेट बराबर होते हैं, तो इकोनॉमी रेट (प्रति ओवर दिए गए रन) के आधार पर निर्णय लिया जाता है। प्रसिद्ध कृष्णा की इकोनॉमी रेट अंशुल कंबोज की तुलना में बेहतर है।
अंशुल कंबोज का रणजी ट्रॉफी में क्या रिकॉर्ड रहा है?
अंशुल ने नवंबर 2024 में हरियाणा की ओर से केरल के खिलाफ एक ऐतिहासिक पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने 49 रन देकर सभी 10 विकेट लिए थे। वह रणजी इतिहास के तीसरे ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने यह कारनामा किया है।
IPL 2026 में पर्पल कैप की रेस में अन्य कौन से खिलाड़ी हैं?
मुख्य दौड़ में रवि बिश्नोई (9 विकेट) तीसरे और जोफ्रा आर्चर (7 विकेट) चौथे स्थान पर हैं। इनके अलावा प्रिंस यादव, जैकब डफी और वैभव अरोड़ा 6-6 विकेटों के साथ रेस में बने हुए हैं।
अंशुल कंबोज की गेंदबाजी शैली की क्या विशेषता है?
अंशुल एक 'हिट द डेक' गेंदबाज हैं, जो 135 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं। उनकी ऑफ-स्टंप लाइन और अतिरिक्त उछाल उन्हें बेहद खतरनाक बनाता है, खासकर डेथ ओवरों में।
अंशुल भाई ने तो सच में आग लगा दी है मैदान पर।